Arhaan Hussain, Prasanna Suresh, Mahendra Dhirajlal Kamdar - Ab Vo Daur Kahaan
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Arhaan Hussain, Prasanna Suresh, Mahendra Dhirajlal Kamdar - Ab Vo Daur Kahaan - оригинальный текст песни, перевод, видео
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अब वो दौर कहाँ, वो उलफ़त तेरी बातों में कहाँ,
वो उलफ़त तेरी बातों में कहाँ,
अब जीने में वो बात कहाँ, वो रस कोई ख़्वाबों में कहाँ,
अब वो दौर कहाँ, वो उलफ़त तेरी बातों में कहाँ,
अब जीने में वो बात कहाँ, वो रस कोई ख़्वाबों में कहाँ,
अब है तिजारत उलफ़त भी सब, अब नहीं वो मज़हब कोई,
अब है तिजारत उलफ़त भी सब, अब नहीं वो मज़हब कोई,
अब है दिखावा मज़हब भी, अब असर कोई नालों में कहाँ,
अब है दिखावा मज़हब भी, अब असर कोई नालों में कहाँ,
अब वो दौर कहाँ, वो उलफ़त तेरी बातों में कहाँ,
वो उलफ़त तेरी बातों में कहाँ,
अब जीने में वो बात कहाँ, वो रस कोई ख़्वाबों में कहाँ,
महज़ तकल्लुफ़ हँसी तेरी सारी, ये कुछ और कहाँ,
महज़ तकल्लुफ़ हँसी तेरी सारी, ये कुछ और कहाँ,
अब चेहरे सारे हैं झूठे, है मा'सूमी आईनों में कहाँ,
अब चेहरे सारे हैं झूठे, है मा'सूमी आईनों में कहाँ,
अब वो दौर कहाँ, वो उलफ़त तेरी बातों में कहाँ,
वो उलफ़त तेरी बातों में कहाँ,
अब जीने में वो बात कहाँ, वो रस कोई ख़्वाबों में कहाँ,
वो उलफ़त तेरी बातों में कहाँ,
अब जीने में वो बात कहाँ, वो रस कोई ख़्वाबों में कहाँ,
अब वो दौर कहाँ, वो उलफ़त तेरी बातों में कहाँ,
अब जीने में वो बात कहाँ, वो रस कोई ख़्वाबों में कहाँ,
अब है तिजारत उलफ़त भी सब, अब नहीं वो मज़हब कोई,
अब है तिजारत उलफ़त भी सब, अब नहीं वो मज़हब कोई,
अब है दिखावा मज़हब भी, अब असर कोई नालों में कहाँ,
अब है दिखावा मज़हब भी, अब असर कोई नालों में कहाँ,
अब वो दौर कहाँ, वो उलफ़त तेरी बातों में कहाँ,
वो उलफ़त तेरी बातों में कहाँ,
अब जीने में वो बात कहाँ, वो रस कोई ख़्वाबों में कहाँ,
महज़ तकल्लुफ़ हँसी तेरी सारी, ये कुछ और कहाँ,
महज़ तकल्लुफ़ हँसी तेरी सारी, ये कुछ और कहाँ,
अब चेहरे सारे हैं झूठे, है मा'सूमी आईनों में कहाँ,
अब चेहरे सारे हैं झूठे, है मा'सूमी आईनों में कहाँ,
अब वो दौर कहाँ, वो उलफ़त तेरी बातों में कहाँ,
वो उलफ़त तेरी बातों में कहाँ,
अब जीने में वो बात कहाँ, वो रस कोई ख़्वाबों में कहाँ,